NCERT Solutions for Class 12 Hindi Antra Chapter 19 – यथास्मै रोचते विश्वं

 

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Antra Chapter 19 – यथास्मै रोचते विश्वं



पाठ - 19
यथास्मै रोचते विश्वं


प्रश्न और अभ्यास


1. लेखक ने कवि की तुलना प्रजापति से क्यों की है? 

उत्तर: लेखक ने कवि की तुलना प्रजापति से इसलिए की है क्यों उन्हें लगता है,कि कवि और प्रजापति दोनों ही दुनिया को बदलने की क्षमता रखते हैं। जिस प्रकार प्रजापति दुनिया में कभी भी परिवर्तन ला सकते हैं।ठीक उसी प्रकार, कवि भी अपनी रचनाओं के माध्यम से संसार को परिवर्तित करने की क्षमता रखता है।


2. ‘साहित्य समाज का दर्पण है’ इस प्रचलित धारणा के विरोध में लेखक ने क्या तर्क दिए हैं?

उत्तर: ‘साहित्य समाज का दर्पण है’ इस प्रचलित धारणा के विरोध में लेखक ने निम्नलिखित तर्क दिए हैं-

  1. यदि साहित्य में इतनी ताकत होती तो दुनिया में परिवर्तन लाने की आश्यकता नहीं होती।

  2. लेखक कहते है, कि कवि अपनी पसंद के अनुसार दुनिया में परिवर्तन लाना चाहता है। जिससे किसी का भी भला नहीं होता तो ऐसा साहित्य समाज का दर्पण नहीं कहला सकता है।

  3. लेखक के अनुसार, जब कवियों को समाज का व्यवहार पसंद नहीं आता तो वह उसे बदलने की इच्छा करता है। ऐसी भावना से लिखा गया साहित्य का दर्पण नहीं बन सकता।


3. दुर्लभ गुणों को एक ही पात्र में दिखाने के पीछे कवि का क्या उद्देश्य है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कवि ने दुर्लभ गुणों को एक ही व्यक्ति में इसलिए दिखाया ताकि वह दिशाहीन युवक दिशा दिखा सके।क्योंकि, ऐसे व्यक्ति का समाज में मिलना संभव नहीं है। जो सभी दुर्लभ गुणों से परिपूर्ण हो। जबकि कवि अपनी इच्छा के अनुसार ऐसा निर्माण कर सकते हैं।


4. “साहित्य थके हुए मनुष्य के लिए विश्रांति ही नहीं है, वह उसे आगे बढ़ने के लिए उत्साहित भी करता है।” स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस कथन से लेखक का अभिप्राय है, कि साहित्य किसी थके हुए व्यक्ति के लिए विश्राम का काम करता है और साथ ही साथ वह उसे हार ना मानने का साहस भी देता है। साहित्य से दिशाहीन व्यक्ति को नई दिशा भी मिलती है और उसका मनोबल भी बढ़ता है।


5. “मानव सम्बन्धों से प्र साहित्य नहीं है।” इस कथन की समीक्षा कीजिए।

उत्तर: कोई भी साहित्य लिखने वाला एक मनुष्य ही है। सभी कवियों में मनुष्य के गुण होते हैं, जो उसके साहित्य में अपनी छाप छोड़ देते हैं। एक लेखक के उसके परिवार के साथ सम्बन्ध से उसका साहित्य प्रभावित होता है। लेखक अपने सगे-संबंधियों के साथ सम्बन्धों के बारे में तब अपने साहित्य में लिखता है जब वह प्रसन्न या दुखी होता है। यही वजह है जो कवि कहते है कि “मानव सम्बन्धों से प्र साहित्य नहीं है।”


6. ‘पंद्रहवी-सोलहवी सदी में हिंदी-साहित्य ने कौन-सी सामाजिक भूमिका निभाई?

उत्तर: पंद्रहवी-सोलहवी सदी हिंदी-साहित्य का स्वर्णिम युग था।इस युग में हमें बहुत ही उच्च स्तर का साहित्य देखने को मिलता है। इस युग के कवि बस भक्ति प्रथा आधारित साहित्य नहीं लिखते थे ।अपितु उस युग के कवि समाज के सभी खराब तत्वों के बारे में भी लिखते थे। पंद्रहवी-सोलहवी सदी में हुई रचनाओं को पढ़कर लोग प्रसन्न भी होते थे तथा उन रचनाओं का लक्ष्य समाज के भेदभावों को दूर करना भी था। पंद्रहवी-सोलहवी शताब्दी के मुख्य कवियों में कबीर, तुलसी, सूरदास, मीरा, रसखान, नानक, घनानंद, नंददास, रहीम, नरोत्तमदास आदि थे।


7. साहित्य के ‘पाँचजन्य’ से लेखक का क्या तात्पर्य है? ‘साहित्य का पाँचजन्य’ मनुष्य को क्या प्रेरणा देता है?

उत्तर: समुद्र मंथन के समय एक शंख निकला था जिसका नाम ‘पाँचजन्य’ था। तथा वह शंख विष्णु के हाथों में विराजमान हुआ। ‘पाँचजन्य’ शंख की एक खास बात थी कि इसमें एक जगह से फूंक मारने पर पाँच अलग-अलग जगहों से आवाज आती है। लेखक ने ‘पाँचजन्य शंख’ की तुलना साहित्य से की है। लेखक कहते है की साहित्य से व्यक्ति को जीवन में लड़ने का साहस मिलता है।


8. साहित्यकार के लिए स्रष्ता और द्रष्टा होना अत्यंत अनिवार्य है, क्यों और कैसे?

उत्तर: साहित्यकार में स्रष्ता और द्रष्टा गुण का होना आवश्यक है। स्रष्ता से लेखक को नई रचनाओं की प्रेणना मिलती है तथा द्रष्टा से लेखक को समाज के भेदभावों को देखने की क्षमता मिलती है। समाज की समस्याओं को लेखक देखता है और उसको अपनी रचनाओं से प्रभावित करने की कोशिश करता है।


9. कवि-पुरोहित के रूप में साहित्यकार की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: पुरोहित आम जनता से कहते हैं, की उन्हें आगे बढ़ना चाहिए और पूजा करनी चाहिए। लेखक ऐसे ही अपने साहित्यों के माध्यम से लोगों को दिशा दिखाता है। लेखक और पुरोहित मिलकर अग्र लोगों को सही मार्गदर्शन नहीं दे पाए तो वह लेखक और पुरोहित कहलाने के काबिल नहीं हैं। कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से आम लोगों को निर्देश देते हैं। इसलिए कहते हैं ,कि कवि और पुरोहित एक समान ही हैं। क्योंकि उनका काम आम लोगों को प्रोत्साहन देना है।


10. सप्रसंग सहित व्याख्या कीजिए:

(क) ‘कवि की यह सृष्टि निराधार नहीं होती। हम उसमें अपनी ज्यों-की-ज्यों आकृति भले ही न देखें, पर ऐसी आकृति जरूर देखते हैं जैसी हमें प्रिय है, जैसी आकृति हम बनाना चाहते हैं।’

उत्तर: प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ रामविलास शर्मा द्वारा लिखित निबन्ध ‘यशास्मै रोचते विश्वं’ से ली गई है। प्रस्तुत पंक्ति में कवि सृष्टि के विषय में अपने विचार व्यक्त करता है।

व्याख्या- कवि द्वारा रचित सृष्टि सिर्फ कल्पना नहीं होती है। कवि वही लिखता है, जो देखता तथा समझता है। उसके पात्र पूरी तरह भले ही हमें अपने आसपास दिखाई नहीं दे परंतु हमें उन पात्रों में ऐसे गुण मिल जाएंगे जो हमें सुख प्रदान करते है। ऐसे पात्र जो हमें प्रिय है। ऐसी सृष्टि की परछाई कवि के रचनाओं में दिखती है जिसकी हम कल्पना करते हैं। भाव यह है कि एक ऐसी रचना है कि जिससे पाठक ऐसा महसूस करता है मानो यह ऐसे लिखा गया हो जैसे कि यह उसके जीवन के उद्देश्य से लिखा गया हो। वह उनकी समस्याओं के प्रति है और उसमें व्याप्त समाधान उनके जीवन में व्याप्त समस्याओं का समाधान दे रहे हैं।


(ख) ‘प्रजापति-कवि गम्भीर यथार्थवादी होता है, ऐसा यथार्थवादी जिसके पाँव वर्तमान की धरती पर हैं और आँखें भविष्य के क्षितिज पर लगी हुई हैं।’

उत्तर: प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ रामविलास शर्मा द्वारा लिखित निबन्ध ‘यशास्मै रोचते विश्वं’ से ली गई है। प्रस्तुत पंक्ति में कवि के गुणों के विषय में बताया गया है।

व्याख्या- लेखक कहते है की सृष्टि की रचना करने वाले कवि गम्भीर यथार्थवादी होते हैं। इस प्रकार के साहित्यकार की विशेषता यह होती है कि वे सत्य को यथावस्था लिखते है। वे वर्तमान पर पैर जमाये भविष्य की रचनाएं करते हैं। उनकी रचनाएं सत्य से परे नहीं होती है।


(ग) ‘इसके सामने निरुद्श्य कला, विकृति काम-वासनाएँ, अहंकार और व्यक्तिवाद, निराशा और पराजय के ‘सिद्धांत वैसे ही नहीं ठहरते जैसे सूर्य के सामने अंधकार।’

उत्तर: 

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ रामविलास शर्मा द्वारा लिखित निबन्ध ‘यशास्मै रोचते विश्वं’ से ली गई है। प्रस्तुत पंक्ति में कवि साहित्य के विषय में अपने विचार व्यक्त करता है।

व्याख्या- लेखक साहित्य की विशेषताओं का वर्णन करते हुए कहते है कि साहित्य सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है। यह सदैव मनुष्य को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। हमारे साहित्य का गौरवशाली इतिहास इस बात का प्रमाण है। हमारे साहित्य में काम वैष्णो, व्यक्ति विशेष को अधिक महत्व, तथा अहंकार इत्यादि के लिए कोई स्थान नहीं है बल्कि साहित्य के अध्ययन से मनुष्य के अन्दर से ये सब ऐसे दूर हो जाते है जैसे सूर्य की रौशनी से अंधेरा।


11. पाठ में प्रतिबिंब-प्रतिबिंबित जैसे शब्दों पर ध्यान दीजिए। इस तरह के दस शब्दों की सूची बनाइए।

उत्तर: पाठ में प्रतिबिंब-प्रतिबिंबित जैसे दस शब्द निम्नलिखित है-

1.संगठन-संगठित

2.असल-असलियत

3.पठ-पठित

4.चित्र-चित्रित

5.चल-चलित

6.लिख-लिखित

7.आमंत्रण-आमंत्रित 

8.दंड-दण्डित

9.प्रमाण-प्रमाणित

10. इतिहास-ऐतिहासिक


12. पाठ में ‘साहित्य के स्वरूप’ पर आए वाक्यों को छाँटकर लिखिए।

उत्तर:

पाठ में ‘साहित्य के स्वरूप’ पर आए वाक्य निम्नलिखित हैं-

(1) साहित्य समाज का दर्पण होता है तो संसार को बदलने की बात न उठती।

(2) साहित्य थके हुए मनुष्य के लिए विश्रांति ही नहीं, वह उसे आगे बढ़ने के लिए उत्साहित भी करता है।

(3) साहित्य का पाञ्चजन्य समरभूमि में उदासीनता का राग नहीं सुना।

(4) साहित्य मानव सम्बन्धों से परे नहीं है।


13. इन पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए: 

(क) कवि की सृष्टि निराधार नहीं होती।

उत्तर: कवि द्वारा रचित सृष्टि सिर्फ कल्पना नहीं होती है। कवि वही लिखता है जो देखता तथा समझता है। उसके पात्र पूरी तरह भले ही हमें अपने आसपास दिखाई नहीं दे परंतु हमें उन पात्रों में ऐसे गुण मिल जायेंगे जो हम सुख प्रदान करते है। ऐसे पात्र जो हमें प्रिय है। ऐसी सृष्टि की परछाई कवि के रचनाओं में दिखती है जिसकी हम कल्पना करते हैं।


(ख) कवि गम्भीर यथार्थवादी होता है।

उत्तर: लेखक कहते है की सृष्टि की रचना करने वाले कवि गम्भीर यथार्थवादी होते हैं। इस प्रकार के साहित्यकारों की विशेषता यह होती है की वे सत्य को यथावस्था लिखते है। वे वर्तमान पर जमाए भविष्य की रचनाएं करते है। उनकी रचनाएं सत्य से परे नहीं होती है।


(ग) धिक्कार है उन्हें जो तीलियाँ तोड़ने के बदले उन्हें मजबूत के रहे हैं।

उत्तर: लेखक कहते है की ऐसे साहित्यकार जिनका साहित्य लोगो को गुलाम बना देता है उन पर धिक्कार है। ऐसे साहित्यकारों को डूबकर मर जाना चाहिए। साहित्यकार को ऐसे साहित्य की रचना करनी चाहिए जो प्रेरणा प्रदान करे।



NCERT Hindi Class 12 Solutions


An Overview of Class 12 Hindi Antra Part 2 Syllabus

NCERT Solutions Class 12 Hindi Antra part 2 comprises 11 chapters of poems, and 10 chapters of proses. Mpboardstudents.blogspot.com provides all the chapter wise questions with answers for all the following chapters:

 

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