NCERT Solutions For Class 12 Hindi पाठ - 5 (क) एक कम (ख) सत्य
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प्रश्न और अभ्यास
1. कवि ने लोगों के आत्मनिर्भर, मालामाल और गतिशील होने के लिए किन तरीकों की ओर संकेत किया है? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: कवि ने लोगों के आत्मनिर्भर, मालामाल और गतिशील होने के अनेक तरीक़े बताए हैं। आज़ादी के बाद आगे बढ़ने की होड़ में सभी अपना इमान खो बैठे हैं। यह पैसा कमाने के लिए कुछ भी ग़लत तरीक़ा अपना सकते हैं। यह सभी लोग मेहनत कर नहीं अपना ईमान बेच कर, झूठ बोलकर और धोखे से आत्मनिर्भर, मालामाल और गतिशील बने हुए हैं। उन्हें किसी दूसरे के दुखों की कोई परवाह नहीं है।
2. हाथ फैलाने वाले व्यक्ति को कवि ने ईमानदार क्यों कहा है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जो व्यक्ति हाथ फैलाता है वह भ्रष्टाचारी नहीं होता क्योंकि भ्रष्टाचार नहीं करने के कारण ही उसकी यह स्थिति हुई है कि दूसरों के आगे हाथ फैलाने पढ़े अगर वह भ्रष्टाचारी होता तो उसके पास इतना धन होता कि वह दूसरों के आगे नहीं झुकता।
3. 1947 से अनेक तरीके से मालामाल हुए किंतु विमुद्रीकरण होने से उन स्थितियों में बदलाव आया या नहीं?
उत्तर: विमुद्रीकरण के समय गरीब लोग प्रभावित हुए हैं और जिन्होंने बचत के लिए पैसे जमा कर सकते थे वह प्रभावित हुए परंतु भ्रष्टाचारी लोग इससे बहुत ज्यादा प्रभावित हुई वह परेशान तो हुए परंतु आम आदमी भी परेशान हो क्योंकि विमुद्रीकरण के बाद की प्रक्रिया को सही से संयोजित नहीं किया जा सका था अतः सरकार द्वारा लिया गया फैसला था परंतु क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं किया जा सका।
4. ‘मैं तुम्हारा विरोधी प्रतिद्वंद्वी या हिस्सेदार नहीं’ से कवि का क्या अभिप्राय है?
उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियों में कवि उनको संबोधित करता है, जो भ्रष्टाचार तथा अनैतिकता में लिप्त हैं। कवि कहता है कि तुम्हें मुझसे डरने या प्रतिस्पर्धा करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि में तुम्हारा प्रतिद्वंद्वी नहीं हूँ। परंतु इसका मतलब यह नहीं कि वह उनके भ्रष्टाचार में सम्मिलित नहीं होगा भ्रष्टाचारी तथा अनैतिक लोग उन्हें अपना प्रतिस्पर्धी या समर्थक ना माने।
5. भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए:
(क) 1947 के बाद से ................ गतिशील होते देखा है
उत्तर : कवि कहना चाहता है कि मैंने 1947 के बाद से बहुत से लोगों को अनेक तरीको से हेरा-फेरी, सच झूठ, धोखे के सहारे आत्मनिर्भर, धनवान और गतिशील होते देखा है। यह अपने जीवन में स्वयं का और अपने परिवार का विकास कर रहे हैं और आगे बढ़ते ही जा रहे हैं। यह पैसों के पीछे अंधे हो चुके हैं।
(ख) मानता हुआ कि हाँ मैं लाचार हूँ .................... एक मामूली धोखेबाज़
उत्तर: कवि खुद को एक लाचार व्यक्ति कहता है। क्योंकि भ्रष्टाचारी लोगों को सामने देखकर भी उनके खिलाफ नहीं बोल सकता उसे इस बात का एहसास है कि यदि वह कोशिश करते तो शायद कुछ कर पाते परंतु भ्रष्टाचार ने उनके हाथ बांध रखे हैं खुद को कमजोर संबोधित करते हैं ईमानदार लोगों को हाथ पर देख कर भी मैं उन लोगों के लिए कुछ नहीं कर सकते।
(ग) तुम्हारे सामने बिलकुल .......................... लिया है हर होड़ से
उत्तर: भाव यह है कि कवि के अनुसार ईमानदार लोगों के समक्ष उसका कोई व्यक्तित्व नहीं है। उनके सम्मुख तो वह स्वयं को नंगा, लज्जा रहित तथा इच्छा रहित मानता है। वह किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा और टकराव की स्थिति से दूर रहना चाहता है।
6. शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए:
(क) कि अब जब कोई ........................ या बच्चा खड़ा है
उत्तर: - कवि ने मुक्तछंद में कविता की रचना की है
- इसकी भाषा सरल व सहज है। इसमें लाक्षणिकता का गुण है।
- हाथ फैलाना मुहावरे का प्रयोग किया गया है।
(ख) मैं तुम्हारा विरोधी प्रतिद्वंद्वी ...................... निश्चिंत रह सकते हैं।
उत्तर: कवि ने मुक्तछंद में कविता की रचना की है। इसकी भाषा सरल व सहज है। इसमें प्रतीकात्मकता का गुण है। इसमें व्यंजना का भी प्रयोग किया गया है।
प्रश्न - अभ्यास:
1. सत्य क्या पुकारने से मिल सकता है? युधिष्ठिर विदुर को क्यों पुकार रहे हैं- महाभारत के प्रसंग से सत्य के अर्थ खोलें।
उत्तर: सत्य अगर पुकारने से मिला तो आज संसार मैं असत्य नाम का शब्द होता ही नहीं। युधिष्ठिर सत्य के ज्ञान के लिए विदुर को पुकार रहे युधिष्ठिर सत्य का ज्ञान करना चाहते थे उन्हें पता लगा कि विदुर जी के साथ सत्य का ज्ञान है तो वह विदुर जी के पास पहुंच गए।
2. सत्य का दिखना और ओझल होना से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: सत्य सभी व्यक्ति के अंदर होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि हर व्यक्ति सत्य को महसूस नहीं कर पाता। सत्यता ओझल हो जाती है जब झूठ सत्य के सामने भारी हो जाता है। सत्य अगर सही तरीके से बोला जाए तो सत्य सत्य है, अगर सत्य को लोग तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करते हैं, तो सत्य ओझल हो जाता है। सत्य हमेशा उनको ही दिखता है, जो सत्य को अपना सबकुछ मान लेते हैं। अर्थात हमेशा सच्चाई के पथ पर चलते है। इसलिए कवि कहते हैं कि सत्य दिखता और ओझल होता है
3.सत्य और संकल्प के अंतर्संबंध पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर: सत्य और संकल्प एक दूसरे से जुड़े हुए हैं उनके बीच एक अटूट संबंध है सत्य संकल्प के बिना अधूरा है, संकल्प के बिना सत्य का ज्ञान नहीं हो सकता सत्य तभी प्राप्त होता है जब मन से सत्य के मार्ग में संकल्प लेकर आगे बढ़े। सत्य का आचरण करना अपने जीवन में बहुत सी कठिनाइयों को सामने लाना है लेकिन फिर भी वह इस संकल्प के साथ सत्य का आचरण करता है तो वह अपने संकल्प को पूरा कर लेता है सच बोलने का।
4. ‘युधिष्ठिर जैसा संकल्प’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: युधिष्ठिर संपूर्ण महाभारत में एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने हमेशा सत्य का साथ दिया। सत्य ही उनके जीवन का महत्वपूर्ण आधार था। युधिष्ठिर इतने सत्यवादी थे। युधिष्ठिर के जीवन में अनेक कठिनाइयां आईं, मगर उन कठिनाई के परिस्थितियों में भी उन्होंने सत्य का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम क्षण तक सत्य का ही साथ दिया।
5. कविता मैं बार–बार प्रयुक्त ‘हम’ कौन हैं और उसकी चिंता क्या है?
उत्तर: कविता में हम शब्द का प्रयोग सत्य की खोज करने वाले लोगों के लिए किया गया है सत्य की खोज करने वाले लोगों की यह चिंता है कि वह सत्य को अभी तक पहचान नहीं पाए हैं उनको सत्य का मूल रूप समझ नहीं आया है।
6. सत्य की राह पर चल। अगर अपना भला चाहता है तो सच्चाई को पकड़।– इन पंक्तियों के प्रकाश में कविता का मर्म खोलिए।
उत्तर: आज जिस समाज में हम सभी रहते हैं, वह समाज और धर्म के पथ पर अग्रसर हो रहा है। आज सच्चाई पर झूठ ज्यादा मजबूत हो रहा है। आज झूठ बोलने वालों को न्याय मिलता है और सच बोलने वालों की अन्याय। अगर समाज में परिवर्तन करना है व न्याय स्थापित करना होगा तो सत्य के मार्ग पर चलना पड़ेगा। इसलिए कवि लोगों से कहते हैं समाज तथा अपनी अच्छाई चाहते हो तो सत्य के मार्ग पर अग्रसर रहो।
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