आखिर क्यों पढ़ाया जाता हैं सहायक वाचन ?
साहित्य जीवन को संस्कारित करता है यह जीवन में संवेदना-विस्तार का आधार बनता है और मनुष्य को विवेक संपन्न भी बनाता हैै। साहित्य जीवन में अक्षय आनंद का स्रोत हैै। उस में निहित अनुभूति समाज और व्यक्ति के बीच सामंजस्य को प्रकट करती हैै। इसमें परंपराओंं, इतिहास और संस्कृति का रचनात्मक स्तर पर समावेश रहता हैै। इस आधार पर साहित्य , जीवन बोध को जगाने में अपनी सार्थक भूमिका निभाता हैै। जीवन के प्रति आस्था, समाज के प्रति सहानुभूति और प्राणीमात्र के प्रति करुणा जगाने में साहित्य की अपनी मेहत्ता है। इसमें सामाजिक परिवर्तन की शक्ति निहित है। इसी आधार पर साहित्य पीढ़ियो को दिशा देने में समर्थ होता है। साहित्य के पठन-पाठन का अवसर अपनी अनेक व्यस्तताओं के बीच भी निकाल लेने वाले लोग जीवन का भरपूर आनंद उठाते हैं - उन्हें जीवन जीने की कला आ जाती है। इसलिए कहा गया है कि ''काव्यशास्त्र विनोदेने गच्छति धीमताम्" बुद्धिमान मनुष्यों का समय काव्य शास्त्र के विनोद में हीं व्यतीत होता है।
छात्र अपने समय और समाज के सम्यक रूप से परिचित हो सके और अपने व्यक्तित्व का सही दिशा में विकास कर सके। इस हेतु उसे अच्छे साहित्य से परिचित कराना जरूरी है। सहजतापूर्वक वह साहित्य से जीवन प्रेरणाएं ग्रहण कर सके तथा इस आधार पर वह एक समुन्नत जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त कर सके। इसी उद्देश्य से प्रेरित होकर द्रुत पठन के रूप में सहायक वाचन जैसे संकलन की उपयोगिता को महत्व माना गया। साहित्य के विस्तृत क्षेत्र से अपने व्यक्तित्व विकास हेतु विद्यार्थी कुछ अच्छी रचनाओं से परिचित हो सकें। इसी उद्देश्य से सहायक वाचन में संकलित रचनाओं का चयन किया गया जाता है। यहां यह ध्यान रखा जाता है कि ऐसा साहित्य प्रेरक और रोचक हो, जीवन में सत्य भावनाओं को जागृत करने वाला हो। आज जबकि हमारा युवा निरंतर अच्छे साहित्य से विमुख होता जा रहा है। तब उसमें साहित्य के प्रति उत्सुकता जगाने के लिए भी सहायक वाचन से यह प्रयास है। किशोर वर्ग में अपने राष्ट्र और अपने समाज के प्रति कर्तव्य भावनाएं जागृत कर उसकी राष्ट्र निर्माण एवं समाज निर्माण में एक सही भूमिका निर्धारित करना भी इस तरह की पाठ्य सामग्री को प्रस्तुत करने में सहायक वाचन का प्रमुख उद्देश्य रहा है। छात्र अपनी जिज्ञासाओं का समुचित समाधान भी इन रचनाओं के माध्यम से पा सकेगा।
छात्रों में सृजनात्मक शक्तियां जागृत करना तथा उन्हें भाषा की सर्जनात्मक चेतना से परिचित कराना भी सहायक वाचन का उद्देश्य है। छात्र अपनी भाषा में समुचित दक्षता प्राप्त कर सके। उसका शब्द भंडार भी समृद्ध हो सके। सहायक वाचन का हर खंड इस रूप में भी सहयोगी होता रहा है।
संक्षिप्त में व्रत पठान के कुछ प्रमुख उद्देश्य निम्नानुसार हैं :-
1. पढ़ने में छात्रों की गति बढ़ाना,
2. साधा के लिए प्रेरित करना,
3. स्वतंत्र पठान की प्रवृत्ति को जगाना,
4. समय के सदुपयोग हेतु प्रेरित करना,
5. मौलिक सृजन और चिंतन जागृत करना,
6. स्वदेश और अपने समाज के प्रति प्रेम और आस्था भाव जगाना,
7. बदलते परिवेश के प्रति सार्थक अनुकूलन करना,
8. समुचित समझ का विकास करना,
9. शिक्षा के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य की पूर्ति करना,
इन आधारों पर सहायक वाचन में विधा वैविध्य और विषय वैविध्य का ध्यान रखा जाता है। कविता, संस्मरण, पत्र, आत्मकथाा, पौराणिक संदर्भ लघुकथाएंं, यात्रा वृतांत, निबंध, लोक साहित्य आदि इस संकलन में संग्रहित होते हैं। इसी तरह ज्ञान-विज्ञान से संबंधित रचनाओं तथा अन्य भाव-प्रवण रचनाओं का भी सहायक वाचन में समावेश होता है।




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