आखिर क्यों पढ़ाया जाता हैं सहायक वाचन ?
सा हित्य जीवन को संस्कारित करता है यह जीवन में संवेदना-विस्तार का आधार बनता है और मनुष्य को विवेक संपन्न भी बनाता हैै। साहित्य जीवन में अक्षय आनंद का स्रोत हैै। उस में निहित अनुभूति समाज और व्यक्ति के बीच सामंजस्य को प्रकट करती हैै। इसमें परंपराओंं, इतिहास और संस्कृति का रचनात्मक स्तर पर समावेश रहता हैै। इस आधार पर साहित्य , जीवन बोध को जगाने में अपनी सार्थक भूमिका निभाता हैै। जीवन के प्रति आस्था, समाज के प्रति सहानुभूति और प्राणीमात्र के प्रति करुणा जगाने में साहित्य की अपनी मेहत्ता है। इसमें सामाजिक परिवर्तन की शक्ति निहित है। इसी आधार पर साहित्य पीढ़ियो को दिशा देने में समर्थ होता है। साहित्य के पठन-पाठन का अवसर अपनी अनेक व्यस्तताओं के बीच भी निकाल लेने वाले लोग जीवन का भरपूर आनंद उठाते हैं - उन्हें जीवन जीने की कला आ जाती है। इसलिए कहा गया है कि ''काव्यशास्त्र विनोदेने गच्छति धीमताम्" बुद्धिमान मनुष्यों का समय काव्य शास्त्र के विनोद में हीं व्यतीत होता है। ...
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